प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने देश के करोड़ों युवाओं को आश्वस्त करते हुए बड़ा ऐलान किया कि पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में देरी होने से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं, इसलिए अब विशेष अदालतों के जरिए मुकदमों का फैसला महीनों में नहीं बल्कि हफ्तों में किया जाएगा।
दूसरी ओर, इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा और गतिरोध देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को नाकाफी बताते हुए सीधे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी एजेंसियों और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की नाकामी के कारण देश के युवाओं का भविष्य अंधकार में लटक गया है। नारेबाजी और हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
शिक्षा मंत्रालय ने इस बीच स्पष्ट किया है कि भविष्य की सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए एक नया डिजिटल और फुल-प्रूफ सिक्योरिटी प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है। इसमें क्वेश्चन पेपर के एन्क्रिप्शन से लेकर परीक्षा केंद्रों की रियल-टाइम बायोमेट्रिक निगरानी तक कई कड़े सुरक्षा चक्र शामिल होंगे। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र और विपक्षी दल इस बात पर अड़े हैं कि जब तक पुराने मामलों में दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती और मौजूदा व्यवस्था में पूर्ण बदलाव नहीं होता, तब तक उनका संसद से लेकर सड़क तक विरोध जारी रहेगा।