नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग अब लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। आज (15 नवंबर) सोशल मीडिया पर एक प्रमुख राजनीतिक नेता का एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ, जिसने देश के कई हिस्सों में तनाव पैदा कर दिया। हालांकि, जांच में पुष्टि हुई कि यह वीडियो पूरी तरह से 'डीपफेक' (Deepfake) तकनीक से बनाया गया था और इसमें कोई सच्चाई नहीं थी।
6 घंटे में 5 करोड़ व्यूज
वीडियो इतना असली लग रहा था कि आम जनता के लिए फर्क करना नामुमकिन था। महज 6 घंटे में इसे 5 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। चुनाव आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को वीडियो हटाने का आदेश दिया। साइबर सेल ने इस वीडियो को बनाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो डार्क वेब के जरिए काम कर रहा था।
सरकार लाएगी नया कानून
इस घटना के बाद केंद्रीय आईटी मंत्री ने आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में 'डिजिटल इंडिया AI एक्ट' पेश करेगी। इसके तहत डीपफेक बनाने और फैलाने वालों को 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को AI जनित कंटेंट पर 'वाटरमार्क' लगाना अनिवार्य होगा। यह घटना डिजिटल युग में 'सच' और 'झूठ' की लड़ाई का एक खतरनाक उदाहरण है।