पटना/लखनऊ: पड़ोसी राज्य बिहार में हुए विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के नतीजे आ गए हैं और जनता ने एक बार फिर स्थिरता और विकास के नाम पर एनडीए (NDA) गठबंधन पर भरोसा जताया है। तमाम एग्जिट पोल्स को झुठलाते हुए भाजपा और जेडीयू गठबंधन ने 243 में से 130+ सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। हालांकि, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन वे जादुई आंकड़े से दूर रह गए।
'MY' समीकरण पर भारी पड़ा 'लव-कुश' और 'अति-पिछड़ा' वोट
तेजस्वी यादव ने अपनी रैलियों में 'रोजगार' और 'जाति जनगणना' का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक, एनडीए की जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) और महादलित वोटरों का एकजुट होना रहा। भाजपा ने यादव वोट बैंक के सामने गैर-यादव ओबीसी (Kurmi-Koeri-Teli) वोटों को लामबंद करने में सफलता पाई।
पूर्वांचल (UP) कनेक्शन क्यों इतना अहम है?
बिहार के नतीजों पर लखनऊ की पैनी नज़र थी और आज भाजपा कार्यालय में होली जैसा माहौल है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के जिले—गाजीपुर, बलिया, देवरिया, चंदौली, मऊ और आजमगढ़—बिहार की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने से सीधे प्रभावित होते हैं। इसे यूपी के लिए 'सेमीफाइनल' माना जा रहा था।
- सपा के लिए खतरे की घंटी: अखिलेश यादव, जिन्होंने बिहार जाकर तेजस्वी यादव के लिए प्रचार किया था, उनके लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका है। यह साबित करता है कि सिर्फ 'PDA' (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) का नारा देना काफी नहीं है, जमीन पर गैर-यादव ओबीसी को साधना जरूरी है।
- 2027 के लिए भाजपा का मनोबल बढ़ा: बिहार की जीत ने यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा और 'डबल इंजन' की अपील अभी भी हिंदी पट्टी में काम कर रही है।
क्या बोले नेता?
जीत के बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, "बिहार ने जंगलराज की वापसी को नकारा है।" वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, "यह जीत राष्ट्रवाद और सुशासन की जीत है। बिहार की जनता ने जातिवाद की राजनीति को हमेशा के लिए दफन कर दिया है।"