नई दिल्ली: अनुच्छेद 370 हटाने (5 अगस्त 2019) की वर्षगांठ पर, केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक वैचारिक एजेंडा पूरा कर लिया है। संसद के दोनों सदनों ने भारी हंगामे के बीच 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - UCC) विधेयक को पारित कर दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह अब कानून बन गया है। इसके तहत देश के सभी नागरिकों के लिए, चाहे वे किसी भी धर्म के हों—विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने के नियम एक समान होंगे।
नए कानून के मुताबिक:
- बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- तलाक के आधार पुरुषों और महिलाओं के लिए समान होंगे।
- लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
- पैतृक संपत्ति में बेटों और बेटियों को बराबर का अधिकार मिलेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मान और समानता देने के लिए है। संविधान निर्माताओं ने भी अनुच्छेद 44 में इसकी कल्पना की थी।"
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विपक्षी दलों और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे "धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला" बताया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। देश के कई हिस्सों में इसके समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन सरकार इसे लैंगिक न्याय की दिशा में सबसे बड़ा सुधार मान रही है।