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नई दिल्ली/बेंगलुरु: भीषण गर्मी के बीच भारत के महानगरों में जल संकट (Water Crisis) गहराता जा रहा है। 'सिलिकॉन वैली' बेंगलुरु के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाके 'डे जीरो' (Day Zero - जब नल से पानी आना बंद हो जाए) की कगार पर पहुंच गए हैं। यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, जिससे वजीराबाद और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 40% कम हो गई है।
पानी की राशनिंग और हिंसा
दिल्ली के संगम विहार, द्वारका और मयूर विहार जैसे इलाकों में लोग बाल्टी लेकर रात-रात भर टैंकरों का इंतजार कर रहे हैं। कई जगहों पर पानी के लिए मारपीट और हिंसा की खबरें भी आ रही हैं। एक प्राइवेट टैंकर के लिए लोग 2000 से 5000 रुपये तक चुकाने को मजबूर हैं। सरकार ने पानी की राशनिंग शुरू कर दी है और कार धोने या बगीचे में पानी डालने पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।
क्लाइमेट चेंज की चेतावनी
पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु परिवर्तन और गिरते भूजल स्तर का नतीजा बताया है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जल्द ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रीसाइकिलिंग पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक भारत के 21 बड़े शहरों में भूजल खत्म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने का सख्त निर्देश दिया है।