पेरिस/नई दिल्ली: भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब सही मायनों में एक वैश्विक ताकत बन गया है। एफिल टॉवर पर यूपीआई लॉन्च होने के एक साल बाद, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने आज एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड और स्पेन समेत यूरोप के 10 प्रमुख देशों में अब भारतीय पर्यटक और छात्र UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।
NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने यूरोपीय भुगतान नेटवर्क 'Worldline' और 'Lyra' के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार किया है। इसका मतलब है कि अगर आप रोम में पिज्जा खा रहे हैं या स्विस आल्प्स में स्कीइंग कर रहे हैं, तो आपको यूरो कैश या फॉरेक्स कार्ड ले जाने की जरूरत नहीं है। आप बस अपने PhonePe, Google Pay या Paytm से QR कोड स्कैन करके रुपये में भुगतान कर सकेंगे, जो रियल-टाइम में यूरो में कन्वर्ट हो जाएगा। यह सुविधा भारतीय यात्रियों के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय (Forex) के झंझट को खत्म कर देगी।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसे "वित्तीय कूटनीति की बड़ी जीत" बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई अब वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) के प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जो रोजाना 50 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है।
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इस कदम से न केवल पर्यटकों को फायदा होगा, बल्कि यह रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण (Internationalization of Rupee) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। कई खाड़ी देश (UAE, ओमान) और एशियाई देश (सिंगापुर, नेपाल) पहले ही यूपीआई को अपना चुके हैं। अब यूरोप में इसकी एंट्री भारत की तकनीकी शक्ति का प्रमाण है।