नई दिल्ली: भारत के 76वें गणतंत्र दिवस (Republic Day 2025) का जश्न आज (26 जनवरी) कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ मनाया गया। इस बार की परेड पूरी तरह से 'महिला शक्ति' (Women Power) को समर्पित रही। इतिहास में पहली बार, परेड में मार्च करने वाली सेना, वायुसेना, नौसेना और अर्धसैनिक बलों की सभी टुकड़ियां (Contingents) सिर्फ महिलाओं की थीं। कर्तव्य पथ पर जब महिला जवानों के बूटों की आवाज गूंजी, तो पूरा देश गर्व से भर उठा।
Image Source: Wikimedia Commons (Representative)
परेड की सलामी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ली। इस वर्ष के मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (काल्पनिक/प्रतीकात्मक) रहे, जिन्होंने भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता की सराहना की। भारतीय वायुसेना के फ्लाईपास्ट में भी महिला फाइटर पायलट्स ने सुखोई और राफेल उड़ाकर आसमान में करतब दिखाए। डीआरडीओ और इसरो की झांकियों में भी महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों, विशेषकर चंद्रयान-3 और गगनयान मिशन में उनकी भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "यह सिर्फ एक परेड नहीं है, यह नए भारत की उस सोच का प्रदर्शन है जहां बेटियां सीमाओं की रक्षा भी कर रही हैं और अंतरिक्ष को भी छू रही हैं।" सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 1500 महिला कलाकारों ने 'वंदे भारत' की थीम पर नृत्य प्रस्तुत किया।
Image Credit: AI Generated
इस आयोजन ने दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब लैंगिक समानता के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। परेड के अंत में दर्शकों ने खड़े होकर महिला वीरांगनाओं का अभिवादन किया।