नई दिल्ली: छठ महापर्व के नहाय-खाय के दिन ही अपनी सुरीली आवाज से इस पर्व को पहचान देने वाली प्रख्यात लोकगायिका शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) का निधन हो गया। 72 वर्षीय शारदा सिन्हा दिल्ली के एम्स (AIIMS) में भर्ती थीं और लंबे समय से मल्टीपल मायलोमा (ब्लड कैंसर) से जूझ रही थीं। 5 नवंबर की रात उनके निधन की खबर से पूरा देश, विशेषकर बिहार और पूर्वांचल शोक में डूब गया।
'पहिले पहिल छठी मईया' और 'कांच ही बांस के बहंगिया' जैसे उनके गीत हर छठ पूजा में गूंजते हैं। उन्हें 'बिहार कोकिला' कहा जाता था। उनके बेटे ने बताया कि छठ के गीतों के बीच ही उन्होंने अंतिम सांस ली। पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जाना संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्हें पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। सलमान खान की फिल्म 'मैंने प्यार किया' का गाना 'कहे तोसे सजना' भी उन्होंने ही गाया था। उनका अंतिम संस्कार पटना में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।