मुंबई: वानखेड़े स्टेडियम में 7 नवंबर को वनडे क्रिकेट इतिहास की सबसे अविश्वसनीय पारी खेली गई। ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल (Glenn Maxwell) ने अफगानिस्तान के खिलाफ हार के कगार पर खड़ी अपनी टीम को अकेले दम पर जीत दिला दी। 292 रनों का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया 91 रन पर 7 विकेट गंवा चुका था और हार निश्चित लग रही थी।
मैक्सवेल को मांसपेशियों में भीषण ऐंठन (Cramps) हो रही थी और वे दौड़ने में असमर्थ थे। इसके बावजूद, उन्होंने एक टांग पर खड़े रहकर बल्लेबाजी की और 128 गेंदों में नाबाद 201 रन जड़ दिए। यह वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक है जो लक्ष्य का पीछा करते हुए (Run Chase) बना है। उन्होंने कप्तान पैट कमिंस (12*) के साथ 8वें विकेट के लिए रिकॉर्ड 202 रनों की साझेदारी की।
सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक, पूरी दुनिया ने इस पारी को 'वनडे इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारी' करार दिया। मैक्सवेल के कई कैच छूटे, जिनका उन्होंने भरपूर फायदा उठाया और अपनी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। यह पारी क्रिकेट के मैदान पर इच्छाशक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई।