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Women's Reservation Bill: नई संसद का पहला बिल पास; 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मिली मंजूरी, लोकसभा-विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण

नई दिल्ली: नए संसद भवन में कामकाज के पहले ही दिन एक इतिहास रच दिया गया। 27 साल से लटका महिला आरक्षण बिल (Women's Reservation Bill), जिसे मोदी सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' नाम दिया है, लोकसभा और राज्यसभा दोनों से भारी बहुमत से पास हो गया है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी।

PM Modi in Parliament
Image Source: Wikimedia Commons

लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 454 वोट पड़े और विरोध में सिर्फ 2 (ओवैसी की पार्टी के), जबकि राज्यसभा में यह सर्वसम्मति से पास हुआ। यह 128वां संविधान संशोधन विधेयक है। हालांकि, इसमें एक पेंच भी है - यह आरक्षण अगली जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू होगा। इसका मतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को यह आरक्षण नहीं मिलेगा, इसके 2029 तक लागू होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "ईश्वर ने मुझे कई पवित्र कामों के लिए चुना है, यह उनमें से एक है। यह बिल देश की माताओं-बहनों के सपनों को पंख देगा।" कांग्रेस ने बिल का समर्थन किया लेकिन इसे तत्काल लागू न करने और ओबीसी कोटा न होने पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा, "यह अच्छा है, लेकिन इसमें ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा होना चाहिए था।"

Women celebrating Reservation Bill
Image Credit: AI Generated

यह कानून 15 साल के लिए लागू रहेगा और इसमें एससी/एसटी महिलाओं के लिए भी कोटे के अंदर कोटा (Quota within Quota) का प्रावधान है। यह भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक मील का पत्थर है।

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