चेन्नई: भारत को भूख और अकाल से निकालकर खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने वाले महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन (MS Swaminathan) का 28 सितंबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 98 वर्ष के थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें 'भारत की हरित क्रांति का जनक' (Father of Green Revolution in India) कहा जाता है।
1960 और 70 के दशक में जब भारत गंभीर खाद्य संकट से गुजर रहा था, तब डॉ. स्वामीनाथन ने अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग के साथ मिलकर गेहूं और चावल की उच्च उपज वाली किस्में (HYV) विकसित कीं। उनके प्रयासों से पंजाब और हरियाणा में कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई। उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट भी दी थी, जिसमें MSP को लागत का 1.5 गुना करने की सिफारिश की गई थी।
पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "कृषि में उनके अभूतपूर्व कार्य ने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की।" उन्हें पद्म विभूषण, रेमन मैग्सेसे और विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका जाना भारत के कृषि जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।