नूंह/गुरुग्राम: हरियाणा का नूंह (मेवात) जिला सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल उठा है। 31 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा निकाली जा रही 'बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा' पर भीड़ द्वारा पथराव और हमले के बाद हिंसा भड़क गई। देखते ही देखते यह आग नूंह से निकलकर साइबर सिटी गुरुग्राम (Gurugram) और सोहना तक फैल गई। उपद्रवियों ने सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और दुकानों में तोड़फोड़ की। इस हिंसा में दो होमगार्ड समेत 6 लोगों की मौत हो गई।
Image Source: Wikimedia Commons (Representative)
हालात पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार ने नूंह, फरीदाबाद और पलवल में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और धारा 144 लगा दी। हिंसा का कारण कथित तौर पर गोरक्षक मोनू मानेसर का एक वीडियो बताया जा रहा है, जिसने यात्रा में शामिल होने की बात कही थी। भीड़ ने एक मंदिर में छिपे 2,500 से अधिक श्रद्धालुओं को घेर लिया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने रेस्क्यू किया।
हिंसा के बाद प्रशासन ने 'बुलडोजर एक्शन' शुरू किया और दंगाइयों के अवैध निर्माणों को गिरा दिया। गुरुग्राम में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगाई और पूछा कि क्या यह "जातीय सफाया" (Ethnic Cleansing) है।
Image Credit: AI Generated
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश थी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना ने एनसीआर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।