नई दिल्ली: आजाद भारत को आज अपना नया लोकतंत्र का मंदिर मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार और सर्वधर्म प्रार्थना के बीच नए संसद भवन (New Parliament Building) का उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक मौके पर पीएम ने तमिलनाडु के अधीनम संतों से प्राप्त पवित्र 'सेंगोल' (Sengol - राजदंड) को लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित किया। यह सेंगोल 1947 में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक था, जिसे अब तक इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया था।
कैसा है नया संसद भवन?
टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा निर्मित यह तिकोना भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें लोकसभा की थीम 'राष्ट्रीय पक्षी मोर' और राज्यसभा की थीम 'राष्ट्रीय पुष्प कमल' पर आधारित है। अब लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सांसद बैठ सकेंगे। पीएम मोदी ने इसे 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक बताया और कहा, "यह भवन सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।"
विपक्ष का बहिष्कार
हालांकि, इस ऐतिहासिक दिन पर राजनीति भी चरम पर रही। कांग्रेस समेत 20 विपक्षी दलों ने समारोह का बहिष्कार किया। उनका तर्क था कि संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों होना चाहिए था, न कि प्रधानमंत्री के। राहुल गांधी ने ट्वीट कर इसे 'लोकतंत्र का अपमान' बताया।