बेंगलुरु: '2024 का सेमीफाइनल' माने जा रहे कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election) के नतीजों ने कांग्रेस में नई जान फूंक दी है। कांग्रेस (Congress) ने 224 में से 135 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जो 1989 के बाद उसकी सबसे बड़ी जीत है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के धुआंधार प्रचार और 'बजरंग बली' के मुद्दे के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) 66 सीटों पर सिमट गई है। जेडीएस (JDS) को भी भारी नुकसान हुआ है।
क्यों हारी भाजपा, क्यों जीती कांग्रेस?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की '5 गारंटियां' (मुफ्त बिजली, महिलाओं को 2000 रुपये आदि) और स्थानीय नेतृत्व की एकजुटता ने काम किया। भाजपा के खिलाफ '40% कमीशन सरकार' (भ्रष्टाचार) का आरोप और एंटी-इनकंबेंसी भारी पड़ी। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' का असर भी उन क्षेत्रों में दिखा जहां से वे गुजरे थे।
'नफरत का बाजार बंद, मोहब्बत की दुकान खुली'
जीत के बाद राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, "कर्नाटक ने दिखा दिया है कि इस देश को मोहब्बत पसंद है। नफरत का बाजार बंद हो गया है।" अब सवाल सीएम फेस का है—सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच रेस शुरू हो गई है। यह जीत 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाएगी।