नई दिल्ली: भारतीय विमानन क्षेत्र को एक बड़ा झटका लगा है। वाडिया समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन गो फर्स्ट (Go First) ने नकदी संकट के चलते खुद को दिवालिया (Insolvency) घोषित करने के लिए एनसीएलटी (NCLT) में अर्जी दाखिल कर दी है। एयरलाइन ने 3 मई से अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी हो गई है।
गो फर्स्ट ने अपनी इस हालत के लिए अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी 'प्रैट एंड व्हिटनी' (P&W) को जिम्मेदार ठहराया है। एयरलाइन का कहना है कि दोषपूर्ण इंजनों की आपूर्ति के कारण उसके आधे से ज्यादा विमान (A320neo) जमीन पर खड़े हैं, जिससे उन्हें भारी राजस्व का नुकसान हुआ है। एयरलाइन पर बैंकों का करीब 6,521 करोड़ रुपये का कर्ज है।
डीजीसीए ने एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और यात्रियों के रिफंड की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। जेट एयरवेज और किंगफिशर के बाद यह भारत में डूबने वाली एक और बड़ी निजी एयरलाइन बन गई है। इस घटना से इंडिगो और एयर इंडिया जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का बाजार में दबदबा और बढ़ सकता है।