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पटना: बिहार की राजनीति में आज (10 अगस्त) एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला। 'पलटू राम' के नाम से विरोधियों के निशाने पर रहने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने एक बार फिर अपना पाला बदल लिया है। उन्होंने एनडीए (NDA) से नाता तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर कर दिया और राजद (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ मिलकर नई सरकार बना ली है।
चाचा-भतीजा फिर एक साथ
राजभवन में आयोजित सादे समारोह में नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 8वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने दूसरी बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद तेजस्वी ने नीतीश के पैर छुए और कहा, "हम बिहार के विकास और युवाओं को रोजगार देने के लिए साथ आए हैं।"
बीजेपी बोली- जनादेश से विश्वासघात
भाजपा ने इसे बिहार की जनता के साथ धोखा बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि 2020 का जनादेश एनडीए के लिए था, लेकिन नीतीश ने अपने निजी स्वार्थ के लिए जनादेश का अपमान किया है। पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने 'विश्वासघात दिवस' मनाया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार की नजर अब 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का चेहरा बनने पर है।