वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी आज अपने पुराने गौरव और आधुनिकता के अद्भुत संगम का गवाह बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम (Kashi Vishwanath Corridor) के पहले चरण का भव्य लोकार्पण किया। लगभग 339 करोड़ रुपये की लागत से बना यह कॉरिडोर अब गंगा तट (ललिता घाट) को सीधे बाबा विश्वनाथ के मंदिर से जोड़ता है, जिससे संकरी गलियों की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है।
पीएम मोदी का अनोखा अंदाज: गंगा स्नान और ध्यान
लोकार्पण से पहले पीएम मोदी ने ललिता घाट पर गंगा नदी में डुबकी लगाई और सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद वे कलश में गंगाजल लेकर नंगे पांव बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और जलाभिषेक किया। अपने संबोधन में पीएम ने कहा, "काशी तो अविनाशी है। एक समय था जब यहां औरंगजेब ने तलवार के दम पर सभ्यता को बदलने की कोशिश की थी, लेकिन इस मिट्टी ने हमेशा आतंक को नकारा है। अगर यहां कोई औरंगजेब आता है, तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं।"
मजदूरों पर पुष्प वर्षा, साथ में भोजन
कार्यक्रम का सबसे भावुक और चर्चा में रहने वाला पल वह था जब पीएम मोदी ने कॉरिडोर का निर्माण करने वाले राजमिस्त्रियों और मजदूरों का सम्मान किया। उन्होंने न सिर्फ उन पर फूलों की वर्षा की, बल्कि उनके साथ जमीन पर पंगत में बैठकर दोपहर का भोजन भी किया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
काशी की बदली तस्वीर
पहले बाबा विश्वनाथ का मंदिर परिसर केवल 3,000 वर्ग फुट में सीमित था, जो अब बढ़कर लगभग 5 लाख वर्ग फुट हो गया है। कॉरिडोर में 23 नई इमारतें बनाई गई हैं, जिनमें यात्री सुविधा केंद्र, मुमुक्षु भवन, वैदिक केंद्र और सिटी म्यूजियम शामिल हैं। शाम को पूरी काशी 'शिव दीपावली' की रोशनी में नहाई हुई नजर आई। सभी घाटों पर लेजर शो और आतिशबाजी ने समां बांध दिया।