नई दिल्ली: भारत के सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण के सपनों को एक बड़ा झटका लगा है। ताइवान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) ने अनिल अग्रवाल की वेदांता (Vedanta) के साथ अपने 19.5 अरब डॉलर (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये) के जॉइंट वेंचर से अलग होने का फैसला किया है। दोनों कंपनियां गुजरात में एक सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले प्लांट लगाने वाली थीं, जिसकी घोषणा पिछले साल धूमधाम से की गई थी।
फॉक्सकॉन ने बयान जारी कर कहा कि "परस्पर सहमति" से उन्होंने इस उपक्रम से हटने का फैसला किया है और अब प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी वेदांता की होगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी प्रोत्साहन (Incentives) मिलने में देरी और तकनीकी साझेदार खोजने में मुश्किलों के कारण यह रिश्ता टूटा।
हालांकि, वेदांता ने कहा है कि वह अन्य भागीदारों के साथ मिलकर अपना चिप प्लांट लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इससे भारत के सेमीकंडक्टर मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और दोनों कंपनियां अब अलग-अलग निवेश करेंगी। विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता बताया है, जबकि सरकार इसे कंपनियों का निजी फैसला बता रही है।