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झारखंड में वन संरक्षण: आदिवासी समुदायों की भागीदारी से बढ़ी हरियाली

Jharkhand Forest Conservation Tribal Participation

रांची, 21 मार्च 2026: झारखंड सरकार के वन संरक्षण प्रयासों ने सफलता प्राप्त की है। आदिवासी समुदायों की सक्रिय भागीदारी से राज्य के कई क्षेत्रों में वन आवरण बढ़ा है। 'वन अधिकार अधिनियम' के तहत स्थानीय लोगों को वन संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप अवैध कटाई में कमी आई है और वन्यजीवों की आबादी स्थिर हुई है।


सरकार ने आदिवासी समुदायों को वन उपज से आय अर्जित करने के लिए प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा, इको-टूरिज्म के माध्यम से उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं। इससे स्थानीय लोग वन संरक्षण को अपनी आजीविका से जोड़कर देख रहे हैं और उसकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।


पर्यावरणविदों ने इस मॉडल की सराहना की है। उनका कहना है कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बिना वन संरक्षण असंभव है। यदि इस गति को बनाए रखा जाता है, तो झारखंड हरियाली और जैव विविधता के संरक्षण में एक मॉडल राज्य बन सकता है। यह कदल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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