
रायपुर, 13 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने खनन उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए एक नई नीति अपनाई है। इस नीति के तहत खनन कंपनियों को स्थानीय समुदायों के विकास और पर्यावरण पुनर्वास के लिए अनिवार्य योगदान देना होगा। इसका उद्देश्य खनिज संसाधनों के दोहन से होने वाले नुकसान की भरपाई करना और स्थानीय लोगों को विकास का भागीदार बनाना है।
नई नीति में 'सामुदायिक विकास निधि' की स्थापना का प्रावधान है, जिसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, खनन क्षेत्रों में वनीकरण और जल संरक्षण परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय आदिवासी समुदायों को खनन गतिविधियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का भी प्रावधान है, जिससे उनकी आवाज सुनी जाए।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने इस नीति का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने इसके पारदर्शी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। यदि यह नीति सफल होती है, तो छत्तीसगढ़ खनन और विकास के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला एक आदर्श राज्य बन सकता है। यह कदम टिकाऊ विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।